Free Cancer Helpline +91 99307 09000 · WhatsApp · Free OPD Helpline
Donate

कैंसर मरीज़ के लिए ख़ून और प्लेटलेट्स: कब ज़रूरत पड़ती है और कैसे इंतज़ाम करें


“डॉक्टर ने कहा है कल तक दो यूनिट ख़ून चाहिए, हम कहाँ से लाएँ?” वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, आज़मगढ़, मिर्ज़ापुर और बिहार के बक्सर-सासाराम से इलाज के लिए आए परिवारों से हमारी हेल्पलाइन पर यह सवाल बहुत आता है। कैंसर के इलाज में कई बार ख़ून (रेड ब्लड सेल्स) या प्लेटलेट्स चढ़ाने की ज़रूरत पड़ती है, और अनजान शहर में घबराहट होना स्वाभाविक है। यह लेख बताता है कि ज़रूरत क्यों पड़ती है, किन लक्षणों पर ध्यान दें, और ख़ून-प्लेटलेट्स का इंतज़ाम आसानी से कैसे करें।

Book Free OPD: ख़ून की कमी, कमज़ोरी या इलाज से जुड़े किसी सवाल पर मुफ़्त सलाह और same-day appointment के लिए कॉल करें +91 99307 09000।

कैंसर में ख़ून की कमी क्यों होती है?

  • कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी हड्डी के अंदर की मज्जा (बोन मैरो) पर असर डालती हैं, जहाँ ख़ून बनता है। इससे हीमोग्लोबिन, सफ़ेद कोशिकाएँ (WBC) और प्लेटलेट्स कुछ दिनों के लिए कम हो सकते हैं।
  • ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया, लिम्फ़ोमा, मायलोमा) में बीमारी ख़ुद ही ख़ून बनने की प्रक्रिया को बिगाड़ देती है।
  • ऑपरेशन में ख़ून बह सकता है।
  • ट्यूमर से ख़ून रिसना, जैसे पेट-आँत, बच्चेदानी के मुँह या मूत्राशय के कैंसर में।
  • कम खाना, आयरन-विटामिन की कमी और लंबी बीमारी।

किन लक्षणों पर ध्यान दें

ख़ून (हीमोग्लोबिन) कम होने पर:

  • बहुत ज़्यादा थकान, थोड़ा चलने पर साँस फूलना
  • चेहरा, होंठ, नाख़ून पीले पड़ना
  • चक्कर, सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज़ होना

प्लेटलेट्स कम होने पर:

  • त्वचा पर लाल-बैंगनी छोटे दाने या नीले निशान
  • मसूड़ों या नाक से ख़ून आना
  • पेशाब या मल में ख़ून, काला मल
  • छोटी चोट पर भी देर तक ख़ून बहना

सफ़ेद कोशिकाएँ (WBC) कम होने पर संक्रमण का ख़तरा बढ़ता है, और बुख़ार सबसे ज़रूरी संकेत है। कीमो के दौरान 100.4°F (38°C) या ज़्यादा बुख़ार हो तो तुरंत अस्पताल को बताएँ। इस पर हमारी गाइड पढ़ें: कीमो के दौरान बुख़ार।

ख़ून कब चढ़ाया जाता है?

हर कम हीमोग्लोबिन पर ख़ून नहीं चढ़ाया जाता। डॉक्टर रिपोर्ट के साथ-साथ मरीज़ के लक्षण, उम्र, दिल की हालत और आगे के इलाज को देखकर फ़ैसला करते हैं। कई बार आयरन, विटामिन या दूसरी दवाओं से भी काम चल जाता है। इसी तरह प्लेटलेट्स तब चढ़ाए जाते हैं जब गिनती बहुत कम हो, ख़ून बह रहा हो, या कोई प्रक्रिया-ऑपरेशन होना हो। ख़ुद से “ख़ून चढ़वा दो” की ज़िद न करें, और न ही डॉक्टर की सलाह को टालें।

ख़ून के अलग-अलग हिस्से

आजकल ब्लड बैंक पूरे ख़ून की जगह उसके हिस्से (components) देते हैं:

  • PRBC (पैक्ड रेड सेल्स): हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए।
  • RDP (रैंडम डोनर प्लेटलेट्स): कई डोनरों से बने प्लेटलेट्स; आमतौर पर कई यूनिट एक साथ चाहिए।
  • SDP (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स / एफ़ेरेसिस): एक ही डोनर से मशीन द्वारा लिए गए प्लेटलेट्स। इसके लिए डोनर को ब्लड बैंक जाकर कुछ घंटे देने होते हैं।
  • FFP (प्लाज़्मा): कुछ ख़ास स्थितियों में।

डॉक्टर की पर्ची पर लिखा होता है कि कौन-सा हिस्सा और कितनी यूनिट चाहिए। ब्लड बैंक जाते समय पर्ची, मरीज़ का ब्लड सैंपल (अगर माँगा गया हो) और मरीज़ का ब्लड ग्रुप साथ रखें।

ख़ून और प्लेटलेट्स का इंतज़ाम कैसे करें?

  1. अस्पताल से पूछें: ज़्यादातर अस्पताल बताते हैं कि किस ब्लड बैंक से ख़ून मिलेगा और “रिप्लेसमेंट डोनर” की ज़रूरत है या नहीं।
  2. रिप्लेसमेंट डोनर: कई ब्लड बैंक कहते हैं कि परिवार का कोई स्वस्थ सदस्य बदले में ख़ून दे। डोनर का ब्लड ग्रुप मरीज़ से मिलना ज़रूरी नहीं होता।
  3. सरकारी पोर्टल e-RaktKosh: भारत सरकार के e-RaktKosh पोर्टल पर आप अपने ज़िले के ब्लड बैंक और उपलब्ध ख़ून की जानकारी देख सकते हैं।
  4. रिश्तेदार, दोस्त और मोहल्ला: पहले से 4-5 ऐसे लोगों की सूची बना लें जो ज़रूरत पर ख़ून या प्लेटलेट्स दे सकें, उनका ब्लड ग्रुप और फ़ोन नंबर लिखकर रखें।
  5. स्वैच्छिक रक्तदान संस्थाएँ और कॉलेज-युवा समूह भी कई शहरों में मदद करते हैं। हमारी हेल्पलाइन रास्ता बताने में मदद करती है।

ध्यान रखें: ख़ून ख़रीदने-बेचने वाले दलालों से बचें। ख़ून सिर्फ़ लाइसेंस वाले ब्लड बैंक से ही लें, जहाँ उसकी HIV, हेपेटाइटिस B-C, मलेरिया और सिफ़लिस जैसी जाँच होती है।

कौन ख़ून दे सकता है?

आमतौर पर 18 से 65 साल का स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वज़न 45-50 किलो से ज़्यादा हो और हीमोग्लोबिन ठीक हो, ख़ून दे सकता है। ब्लड बैंक डोनर की छोटी जाँच और सवाल पूछकर तय करता है। हाल में बुख़ार, कुछ दवाएँ, टैटू या शराब पीने पर कुछ समय रुकना पड़ सकता है। ख़ून देने से पहले अच्छा खाना खाएँ और पानी पिएँ।

ख़ून चढ़ाते समय ध्यान रखें

  • चढ़ाने से पहले नर्स मरीज़ का नाम, ब्लड ग्रुप और यूनिट का नंबर मिलाती है; आप भी देखें।
  • चढ़ाते समय या बाद में ठंड लगना, बुख़ार, खुजली, दाने, साँस फूलना या पीठ दर्द हो तो तुरंत नर्स को बताएँ।
  • घर पर प्लेटलेट्स कम हों तो मुलायम ब्रश इस्तेमाल करें, नाक ज़ोर से न छिड़कें, दाढ़ी के लिए इलेक्ट्रिक रेज़र लें, और बिना पूछे दर्द की गोली (जैसे एस्पिरिन) न लें।

घर पर हीमोग्लोबिन के लिए खान-पान

दाल, चना, सोयाबीन, गुड़-चना, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (अच्छी तरह धोकर पकाई हुई), अंडा, अनार, और विटामिन C के लिए आँवला-नींबू मदद करते हैं। लेकिन खाने से अकेले जल्दी हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ता; डॉक्टर की दवा और सलाह ज़रूरी है। कीमो के दौरान कच्ची सलाद और बाहर का खाना न लें।

वाराणसी और प्रयागराज में इलाज और मदद

ज़ेनहील कैंसर हॉस्पिटल, वाराणसी और प्रयागराज में डे-केयर कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियोथेरेपी होती है, और आयुष्मान भारत पात्र मरीज़ों के लिए मान्य है। डॉक्टरों में वाराणसी में डॉ. अमित कुमार पाठक और प्रयागराज में डॉ. मोहम्मद अक़ील शामिल हैं। ब्लड कैंसर पर पढ़ें: प्रयागराज में ब्लड कैंसर का इलाज। जानकारी: वाराणसी कैंसर हॉस्पिटल, ZenHeal वाराणसी, प्रयागराज कैंसर हॉस्पिटल और ZenHeal प्रयागराज।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैंसर मरीज़ को ख़ून क्यों चढ़ाना पड़ता है?

कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, ब्लड कैंसर, ऑपरेशन या ट्यूमर से ख़ून रिसने के कारण हीमोग्लोबिन या प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। डॉक्टर लक्षण और रिपोर्ट देखकर तय करते हैं।

प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण क्या हैं?

त्वचा पर लाल-बैंगनी दाने या नीले निशान, मसूड़ों या नाक से ख़ून, पेशाब या मल में ख़ून और छोटी चोट पर देर तक ख़ून बहना।

क्या डोनर का ब्लड ग्रुप मरीज़ से मिलना ज़रूरी है?

रिप्लेसमेंट डोनेशन के लिए आमतौर पर नहीं। ब्लड बैंक बदले में मरीज़ के ग्रुप का ख़ून देता है। SDP प्लेटलेट्स के लिए मिलान ज़रूरी हो सकता है।

ब्लड बैंक की जानकारी कहाँ मिलेगी?

अस्पताल से पूछें, और भारत सरकार के e-RaktKosh पोर्टल पर अपने ज़िले के ब्लड बैंक और उपलब्ध ख़ून देखें।

मदद के लिए किससे संपर्क करें?

+91 99307 09000 पर कॉल करें। हम रास्ता बताने, मुफ़्त सलाह और same-day appointment में मदद करते हैं।

“Best cancer hospital” खोज रहे हैं?

बहुत से परिवार इंटरनेट पर “best cancer hospital in Varanasi” या “best cancer hospital in Prayagraj” खोजते हैं। नाम से ज़्यादा ज़रूरी है कि अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ (मेडिकल और सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) हों, डे-केयर कीमोथेरेपी हो, सीटी/एमआरआई/पीईटी-सीटी की सुविधा तक पहुँच हो, आयुष्मान भारत स्वीकार हो, और डॉक्टर आपको पूरी योजना आसान भाषा में समझाएँ। शंका हो तो दूसरी राय लेना हमेशा ठीक है।

Love Heals Cancer कैसे मदद करता है

Love Heals Cancer एक गैर-लाभकारी संस्था है जो कैंसर मरीज़ों और उनके परिवारों की मदद करती है। हमारी हेल्पलाइन मुफ़्त है और हिंदी व अंग्रेज़ी में चलती है:

  • रिपोर्ट का मुफ़्त रिव्यू और सही विशेषज्ञ तक पहुँच
  • पास के अस्पताल में same-day appointment दिलाने में मदद
  • आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री राहत कोष, राष्ट्रीय आरोग्य निधि और एनजीओ मदद पर मार्गदर्शन
  • मरीज़ और परिवार के लिए काउंसलिंग

हम कभी OTP या बैंक की जानकारी नहीं माँगते, और इलाज की गारंटी का वादा नहीं करते। हमारा लक्ष्य है कि आपको समय पर सही इलाज मिले। अधिक पढ़ें: आर्थिक मदद और हीलिंग स्टोरीज़।

अभी कॉल करें: +91 99307 09000 | Book Free OPD | same-day appointment

यह लेख जागरूकता के लिए है और डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता।

Request a Cancer Counselor Callback

For patients and families across Uttar Pradesh and Bihar: for questions about reports, treatment options, costs or the Ayushman card, leave your name and phone number to request a callback from a patient counselor. काउंसलर से कॉलबैक का अनुरोध करने के लिए अपना नाम और फ़ोन नंबर छोड़ें।







    Love Heals Cancer is a non-profit. We do not promise cures; treatment is decided by your oncologist. By submitting you agree to be contacted by phone/WhatsApp.

    In this article

    NA

    Scroll to Top