आँत (कोलन) या मलाशय (रेक्टम) के कैंसर के ऑपरेशन के बाद कई मरीज़ों के पेट पर एक छोटा-सा मुँह बनाया जाता है, जिसे स्टोमा कहते हैं। मल इसी रास्ते से एक थैली (बैग) में आता है। इसे कोलोस्टोमी (बड़ी आँत से) या इलियोस्टोमी (छोटी आँत से) कहते हैं। वाराणसी, प्रयागराज, गाज़ीपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़ और बिहार से अस्पताल से लौटे कई परिवार हमें बताते हैं कि घर आकर बैग देखकर वे घबरा गए: “बैग कैसे बदलें? त्वचा लाल क्यों हो रही है? क्या खाना खिलाएँ?” यह लेख आसान भाषा में इन्हीं सवालों के जवाब देता है। अपने अस्पताल की नर्स और डॉक्टर की सलाह हमेशा सबसे ऊपर रखें।
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स्टोमा क्या है और क्यों बनाया जाता है?
स्टोमा आँत का वह सिरा है जिसे ऑपरेशन में पेट की दीवार पर खोल दिया जाता है। यह गुलाबी-लाल, नम और गोल होता है, और इसमें दर्द की नसें नहीं होतीं, इसलिए छूने पर दर्द नहीं होता। कुछ मरीज़ों में स्टोमा कुछ महीनों के लिए (temporary) बनाया जाता है, ताकि अंदर का जोड़ ठीक से भर सके; बाद में दूसरे छोटे ऑपरेशन से इसे बंद कर दिया जाता है। कुछ मरीज़ों में यह स्थायी (permanent) होता है। अपने सर्जन से ज़रूर पूछें कि आपका स्टोमा किस तरह का है।
बैग के प्रकार
- वन-पीस बैग: थैली और चिपकने वाली प्लेट एक साथ होती है।
- टू-पीस बैग: प्लेट (flange/wafer) त्वचा पर कुछ दिन लगी रहती है और थैली अलग से बदली जाती है।
- बंद (closed) बैग: भरने पर पूरा बदला जाता है।
- ड्रेनेबल (खुलने वाला) बैग: नीचे से खोलकर ख़ाली किया जा सकता है, ख़ासकर पतले मल के लिए।
नर्स आपको बताएगी कि कौन-सा बैग आपके लिए ठीक है और स्टोमा का साइज़ क्या है। अस्पताल से लौटते समय बैग का ब्रांड, साइज़ और नंबर लिखवा लें, ताकि बाज़ार या मेडिकल स्टोर से वही मिल सके।
बैग कब ख़ाली करें और कब बदलें?
- बैग एक-तिहाई से आधा भरने पर ख़ाली करें। ज़्यादा भरा बैग भारी होकर उखड़ सकता है।
- प्लेट या वन-पीस बैग आमतौर पर हर एक-तीन दिन में बदला जाता है, या जब किनारों से रिसाव (leakage) हो, खुजली या जलन हो।
- बैग बदलने का सबसे अच्छा समय सुबह, नाश्ते से पहले है, जब आँत कम सक्रिय होती है।
बैग बदलने का आसान तरीक़ा
- सामान पहले से तैयार रखें: नया बैग, कैंची, साइज़ नापने का कार्ड, गुनगुना पानी, साफ़ मुलायम कपड़ा या रुई, पुराने बैग के लिए पॉलीथीन।
- हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएँ।
- पुराना बैग ऊपर से नीचे की ओर धीरे-धीरे हटाएँ, एक हाथ से त्वचा को दबाए रखें। झटके से न खींचें।
- स्टोमा और आसपास की त्वचा को सिर्फ़ गुनगुने पानी से साफ़ करें। डेटॉल, स्पिरिट या तेज़ ख़ुशबू वाला साबुन न लगाएँ।
- त्वचा को थपथपाकर पूरी तरह सुखाएँ। गीली त्वचा पर बैग नहीं चिपकता।
- प्लेट का छेद स्टोमा के नाप से बस 2-3 मिलीमीटर बड़ा काटें। बहुत बड़ा छेद त्वचा को मल के संपर्क में लाता है, बहुत छोटा स्टोमा को चोट पहुँचा सकता है।
- बैग नीचे से ऊपर की ओर चिपकाएँ और हथेली से 30 सेकंड तक हल्के से दबाएँ, ताकि गर्मी से अच्छी तरह चिपक जाए।
- पुराना बैग पॉलीथीन में बाँधकर कूड़ेदान में डालें, शौचालय में न बहाएँ। फिर हाथ धोएँ।
ऑपरेशन के बाद के पहले कुछ हफ़्तों में स्टोमा थोड़ा सिकुड़ता है, इसलिए साइज़ हर बार नापें।
स्टोमा के आसपास की त्वचा का ध्यान
त्वचा पर लाली, जलन, दाने या घाव ज़्यादातर रिसाव या ग़लत साइज़ की वजह से होते हैं। नर्स से पूछकर बैरियर क्रीम या पाउडर इस्तेमाल करें। आसपास के बाल हों तो कैंची से सावधानी से काटें। अगर बार-बार रिसाव होता है, तो नर्स को दिखाएँ; पेट की सिलवटों के हिसाब से अलग बैग या रिंग की ज़रूरत हो सकती है।
खान-पान
- ऑपरेशन के बाद पहले कुछ हफ़्ते हल्का, कम रेशे वाला खाना: खिचड़ी, दलिया, सूजी, दही, उबले आलू, केला, पनीर, अंडा।
- छोटे-छोटे भोजन दिन में कई बार, धीरे-धीरे और अच्छे से चबाकर।
- पानी भरपूर पिएँ, ख़ासकर इलियोस्टोमी में, क्योंकि शरीर से पानी ज़्यादा निकलता है। ORS, नारियल पानी, छाछ, दाल का पानी अच्छा है।
- गैस और बदबू बढ़ाने वाली चीज़ें (राजमा, छोले, गोभी, प्याज़-लहसुन ज़्यादा, कोल्ड ड्रिंक) शुरू में कम रखें, फिर एक-एक करके आज़माएँ।
- साबुत मूँगफली, मकई, नारियल के टुकड़े, फलों के छिलके-बीज जैसी चीज़ें ठीक से न चबाएँ तो स्टोमा में अटक सकती हैं।
हर व्यक्ति अलग होता है; एक डायरी में लिखें कि किस खाने से दिक़्क़त होती है।
नहाना, कपड़े, काम और सफ़र
- बैग लगाकर या हटाकर, दोनों तरह नहा सकते हैं। पानी स्टोमा के अंदर नहीं जाता।
- ढीले कपड़े पहनें; बैग आमतौर पर कपड़ों के नीचे दिखता नहीं।
- ठीक होने के बाद ज़्यादातर लोग काम, पूजा-पाठ, शादी-ब्याह और सफ़र में शामिल होते हैं। सफ़र में अतिरिक्त बैग, कैंची, पानी और पॉलीथीन साथ रखें।
- डॉक्टर की इजाज़त तक भारी वज़न न उठाएँ, ताकि स्टोमा के पास हर्निया न बने।
तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएँ?
- स्टोमा का रंग गहरा बैंगनी, काला या बहुत फीका हो जाए
- स्टोमा से लगातार ख़ून आए
- 6-8 घंटे से ज़्यादा कुछ बाहर न आए और पेट फूले, उल्टी हो
- बहुत पतला मल लगातार आए, कमज़ोरी, चक्कर या पेशाब कम हो (पानी की कमी)
- स्टोमा बहुत बाहर निकल आए या अंदर धँस जाए
- तेज़ बुख़ार या त्वचा में गहरा घाव
मन की बात
बैग के साथ जीना शुरू में अजीब लगता है। कई मरीज़ शर्म, बदबू के डर या “अब मैं पहले जैसा नहीं रहा” की भावना से लोगों से मिलना छोड़ देते हैं। यह स्वाभाविक है, और समय के साथ आसान होता जाता है। परिवार धैर्य रखे, मज़ाक या नाक-भौं न सिकोड़े। हमारी हेल्पलाइन पर मुफ़्त काउंसलिंग मिलती है, और ऐसे दूसरे मरीज़ों से बात करना भी हौसला देता है।
वाराणसी और प्रयागराज में मदद कहाँ?
ज़ेनहील कैंसर हॉस्पिटल, वाराणसी में डॉ. प्रितेश राजीव सिंह (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) और प्रयागराज में डॉ. विशाल केवलानी (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) आँत और मलाशय के कैंसर की सर्जरी करते हैं। आयुष्मान भारत पात्र मरीज़ों के लिए मान्य है। जानकारी: वाराणसी में कोलन-रेक्टल कैंसर का इलाज, वाराणसी कैंसर हॉस्पिटल, ZenHeal वाराणसी, प्रयागराज कैंसर हॉस्पिटल और ZenHeal प्रयागराज।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कोलोस्टोमी बैग कितने दिन में बदलना चाहिए?
आमतौर पर हर एक-तीन दिन में, या जब रिसाव, खुजली या जलन हो। बैग एक-तिहाई से आधा भरने पर ख़ाली करें।
स्टोमा के आसपास त्वचा लाल क्यों होती है?
ज़्यादातर रिसाव या प्लेट का छेद बड़ा होने से। छेद स्टोमा से बस 2-3 मिलीमीटर बड़ा काटें और नर्स से बैरियर क्रीम के बारे में पूछें।
क्या बैग के साथ नहा सकते हैं?
हाँ। बैग लगाकर या हटाकर दोनों तरह नहा सकते हैं; पानी स्टोमा के अंदर नहीं जाता।
क्या स्टोमा हमेशा के लिए होता है?
हर बार नहीं। कई मरीज़ों में यह कुछ महीनों के लिए बनता है और बाद में दूसरे ऑपरेशन से बंद हो जाता है। अपने सर्जन से पूछें।
स्टोमा में परेशानी हो तो किससे बात करें?
+91 99307 09000 पर कॉल करें। हम मुफ़्त सलाह और ज़ेनहील वाराणसी या प्रयागराज में same-day appointment दिलाने में मदद करते हैं।
“Best cancer hospital” खोज रहे हैं?
बहुत से परिवार इंटरनेट पर “best cancer hospital in Varanasi” या “best cancer hospital in Prayagraj” खोजते हैं। नाम से ज़्यादा ज़रूरी है कि अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ (मेडिकल और सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) हों, डे-केयर कीमोथेरेपी हो, सीटी/एमआरआई/पीईटी-सीटी की सुविधा तक पहुँच हो, आयुष्मान भारत स्वीकार हो, और डॉक्टर आपको पूरी योजना आसान भाषा में समझाएँ। शंका हो तो दूसरी राय लेना हमेशा ठीक है।
Love Heals Cancer कैसे मदद करता है
Love Heals Cancer एक गैर-लाभकारी संस्था है जो कैंसर मरीज़ों और उनके परिवारों की मदद करती है। हमारी हेल्पलाइन मुफ़्त है और हिंदी व अंग्रेज़ी में चलती है:
- रिपोर्ट का मुफ़्त रिव्यू और सही विशेषज्ञ तक पहुँच
- पास के अस्पताल में same-day appointment दिलाने में मदद
- आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री राहत कोष, राष्ट्रीय आरोग्य निधि और एनजीओ मदद पर मार्गदर्शन
- मरीज़ और परिवार के लिए काउंसलिंग
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यह लेख जागरूकता के लिए है और डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता।
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