बच्चेदानी के मुँह का कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) भारत में महिलाओं में सबसे आम कैंसरों में से एक है। उत्तर प्रदेश और बिहार के गाँवों और क़स्बों में बहुत-सी महिलाएँ तब अस्पताल पहुँचती हैं जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। अच्छी ख़बर यह है कि यह उन गिने-चुने कैंसरों में है जिनसे काफ़ी हद तक बचाव संभव है: एक टीके (HPV वैक्सीन) और नियमित जाँच से। वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, मिर्ज़ापुर, प्रतापगढ़ और बिहार के कई परिवार हमसे पूछते हैं: “क्या बेटी को यह टीका लगवाना चाहिए? किस उम्र में? क्या यह सुरक्षित है?” यह लेख इन्हीं सवालों के आसान जवाब देता है।
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HPV क्या है?
HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) एक बहुत आम वायरस है, जो शारीरिक संबंध से फैलता है। ज़्यादातर लोगों को जीवन में कभी न कभी यह संक्रमण होता है, और अधिकांश मामलों में शरीर ख़ुद इसे एक-दो साल में ख़त्म कर देता है। लेकिन कुछ हाई-रिस्क प्रकार (ख़ासकर टाइप 16 और 18) अगर लंबे समय तक शरीर में बने रहें, तो बच्चेदानी के मुँह की कोशिकाओं में धीरे-धीरे बदलाव करते हैं, जो कई सालों में कैंसर बन सकते हैं।
सर्वाइकल कैंसर के लगभग सभी मामलों में HPV की भूमिका पाई गई है। HPV से मुँह-गले, गुदा और पुरुषों में लिंग के कुछ कैंसर भी जुड़े हैं।
ध्यान दें: HPV होना किसी के चरित्र के बारे में कुछ नहीं बताता। यह इतना आम है कि शादीशुदा, एक ही साथी वाली महिलाओं को भी हो सकता है।
HPV वैक्सीन कैसे काम करती है?
HPV वैक्सीन शरीर को इस वायरस के ख़िलाफ़ पहले से सुरक्षा (एंटीबॉडी) बनाना सिखाती है, ताकि संक्रमण होने पर वह जड़ न पकड़ सके। टीका संक्रमण होने से पहले सबसे ज़्यादा असरदार होता है, इसीलिए इसे किशोर उम्र में लगाने की सलाह दी जाती है। यह टीका पहले से हुए संक्रमण या कैंसर का इलाज नहीं करता।
भारत में कई HPV वैक्सीन उपलब्ध हैं, जिनमें देश में बनी वैक्सीन भी शामिल है। कौन-सी वैक्सीन लगेगी, यह डॉक्टर बताएँगे।
किस उम्र में लगवाएँ?
- 9 से 14 साल की लड़कियाँ: सबसे सही उम्र। इस उम्र में टीके का असर सबसे अच्छा होता है और आमतौर पर कम ख़ुराक लगती है।
- 15 से 26 साल की लड़कियाँ और महिलाएँ: अगर पहले नहीं लगा है तो अब भी लगवाया जा सकता है; ख़ुराक की संख्या ज़्यादा हो सकती है।
- 26 साल से ऊपर: कुछ मामलों में डॉक्टर सलाह दे सकते हैं; फ़ायदा व्यक्ति के हिसाब से अलग होता है।
- लड़के: कई देशों में लड़कों को भी यह टीका दिया जाता है; अपने डॉक्टर से पूछें।
ख़ुराक कितनी और कितने अंतर पर लगेगी, यह उम्र और वैक्सीन के प्रकार पर निर्भर करता है। डॉक्टर या स्वास्थ्य केंद्र की बताई अनुसूची पूरी करें।
क्या HPV वैक्सीन सुरक्षित है?
हाँ। दुनिया भर में करोड़ों ख़ुराकें दी जा चुकी हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसे सुरक्षित और असरदार मानता है। आम साइड इफ़ेक्ट्स हल्के और कुछ समय के होते हैं:
- इंजेक्शन की जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन
- हल्का बुख़ार या सिरदर्द
- कुछ किशोरियों को चक्कर; इसलिए टीके के बाद 15 मिनट बैठकर आराम करवाया जाता है
आम ग़लतफ़हमियाँ:
- “इस टीके से बाँझपन होता है।” ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। उल्टा, यह टीका ऐसे कैंसर से बचाता है जिसके इलाज में बच्चेदानी तक निकालनी पड़ सकती है।
- “टीका लगवाने से लड़कियाँ बिगड़ जाती हैं।” यह एक सामाजिक भ्रम है। टीका सिर्फ़ एक बीमारी से सुरक्षा है, जैसे पोलियो या ख़सरे का टीका।
- “शादी के बाद टीका बेकार है।” 26 साल तक की महिलाओं को अब भी फ़ायदा हो सकता है, क्योंकि शायद उन्हें सभी हाई-रिस्क प्रकारों का संक्रमण न हुआ हो।
टीका कहाँ लगवाएँ?
HPV वैक्सीन निजी बाल-रोग विशेषज्ञों, स्त्री-रोग विशेषज्ञों और कई अस्पतालों में उपलब्ध है। केंद्र सरकार ने 9 से 14 साल की लड़कियों के लिए HPV टीकाकरण को बढ़ावा देने की घोषणा की है, और कुछ राज्यों व ज़िलों में स्कूल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से अभियान चलाए गए हैं। अपने ज़िले में मुफ़्त या सरकारी टीकाकरण की जानकारी के लिए नज़दीकी PHC/CHC, आशा कार्यकर्ता या ज़िला अस्पताल से पूछें।
टीके के बाद भी जाँच क्यों ज़रूरी है?
HPV वैक्सीन सभी हाई-रिस्क प्रकारों से सुरक्षा नहीं देती। इसलिए टीका लगी महिलाओं को भी नियमित स्क्रीनिंग करवानी चाहिए:
- VIA जाँच: सरकारी केंद्रों पर सिरके के घोल से की जाने वाली आसान जाँच।
- पैप स्मीयर: बच्चेदानी के मुँह से कोशिकाएँ लेकर लैब में जाँच।
- HPV टेस्ट: वायरस के हाई-रिस्क प्रकारों की जाँच।
आमतौर पर 25-30 साल की उम्र से जाँच शुरू करने और डॉक्टर के बताए अंतर पर दोहराने की सलाह दी जाती है। स्क्रीनिंग से कैंसर बनने से पहले के बदलाव पकड़े जा सकते हैं, जिनका इलाज आसान होता है।
इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें
टीका लगा हो या नहीं, ये लक्षण हों तो जल्दी डॉक्टर को दिखाएँ:
- दो माहवारी के बीच या शारीरिक संबंध के बाद ख़ून आना
- माहवारी बंद होने (मेनोपॉज़) के बाद ख़ून आना
- बदबूदार या ख़ून मिला सफ़ेद पानी
- कमर या पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द
वाराणसी और प्रयागराज में सलाह कहाँ लें?
अगर जाँच में कोई बदलाव मिला है या लक्षण हैं, तो कैंसर विशेषज्ञ से सलाह लें। ज़ेनहील कैंसर हॉस्पिटल, वाराणसी में डॉ. अमित कुमार पाठक (ऑन्कोलॉजिस्ट, MBBS, MD, IMS BHU) और डॉ. प्रितेश राजीव सिंह (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) उपलब्ध हैं। जानकारी: वाराणसी कैंसर हॉस्पिटल, ZenHeal वाराणसी।
प्रयागराज (जॉर्ज टाउन) में डॉ. मोहम्मद अक़ील और डॉ. विशाल केवलानी उपलब्ध हैं। जानकारी: प्रयागराज कैंसर हॉस्पिटल, ZenHeal प्रयागराज।
बायोप्सी या पैप रिपोर्ट के शब्द समझने के लिए हमारा लेख बायोप्सी रिपोर्ट कैसे समझें पढ़ें।
माता-पिता के लिए एक संदेश
बेटी को HPV टीका लगवाना उसके भविष्य के स्वास्थ्य में एक छोटा पर बड़ा निवेश है। घर की बड़ी महिलाओं, जैसे माँ, चाची, दादी को भी नियमित जाँच के लिए प्रेरित करें। सर्वाइकल कैंसर के बारे में खुलकर बात करना शर्म की नहीं, समझदारी की बात है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
HPV वैक्सीन किस उम्र में लगवानी चाहिए?
9 से 14 साल की उम्र सबसे सही मानी जाती है। 26 साल तक की लड़कियाँ और महिलाएँ भी डॉक्टर की सलाह से लगवा सकती हैं।
क्या HPV वैक्सीन सुरक्षित है?
हाँ। WHO इसे सुरक्षित मानता है। हल्का दर्द, सूजन या बुख़ार जैसे साइड इफ़ेक्ट्स कुछ समय में ठीक हो जाते हैं।
क्या टीका लगने के बाद पैप स्मीयर की ज़रूरत नहीं?
ज़रूरत है। टीका सभी हाई-रिस्क प्रकारों से सुरक्षा नहीं देता, इसलिए 25-30 साल की उम्र से नियमित जाँच करवाते रहें।
क्या शादीशुदा महिला HPV वैक्सीन लगवा सकती है?
हाँ, 26 साल तक की उम्र में डॉक्टर की सलाह से लगवा सकती है। उससे ज़्यादा उम्र में डॉक्टर व्यक्तिगत सलाह देंगे।
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- रिपोर्ट का मुफ़्त रिव्यू और सही विशेषज्ञ तक पहुँच
- पास के अस्पताल में same-day appointment दिलाने में मदद
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- मरीज़ और परिवार के लिए काउंसलिंग
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ज़ेनहील ऑन्कोलॉजी टीम द्वारा चिकित्सकीय समीक्षा। यह लेख जागरूकता के लिए है और डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता।
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